कथा सार एवं संपूर्ण कथा Katha Saar & Story
सनातन धर्म में यह सर्वविदित है कि भगवान् नारायण ने तीनो लोकों में धर्म की रक्षा एवं सुख-शांति बनी रहे इसके लिए समय-समय पर अवतार लिया । ठीक उसी तरह त्रेता युग में भगवान् श्री नारायण ने राम का अवतार धारण किया जो मनुष्यों और मानवों में सर्वश्रेष्ठ हैं । जो धर्म का पालन करने वाले हैं, वचनो को निभाने वाले हैं, राजा के रूप में प्रजा के लिए न्याय की प्रतिमूर्ति हैं, पति के रूप में धर्म परायण पति हैं, मर्यादाओं का पालन करने वाले हैं, मर्यादा पुरुषोत्तम हैं ।
श्री राम का सम्बन्ध ‘इक्ष्वाकु वंश ’ से है इसलिए उन्हें ‘सूर्यवंशी राजा’ कहा जाता है । राजा ‘इक्ष्वाकु’ जो भगवान सूर्य के पुत्र थे, उनके द्वारा ‘इक्ष्वाकु सूर्यवंश स्थापित किया गया था । श्री रामचंद्र जी राजा दशरथ और महारानी कौशल्या के पुत्र थे । राजा दशरथ की तीन रानियाँ थी कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी भगवान् राम तीनो माताओं के लिए एक जैसा प्रेम और सम्मान अपने हृदय में रखते थे । भगवान् श्री राम हिंदू धर्म के एक प्रमुख देवता हैं, विशेष रूप से वैष्णव परंपरा के मानने वालों के लिए वह महत्वपूर्ण हैं । एक चक्रवर्ती राजा के घर परिवार में जन्मे भगवान राम ने धर्म और कर्तव्यों के निर्वहन के लिए कभी समझौता नहीं किया । उन्होंने ने वचन निभाने के लिए चौदह वर्ष का वनवास किया । भगवान् राम बड़े भाई के रूप में भरत, लक्ष्मण एवं शत्रुघ्न और समाज के लिए सर्वश्रेष्ठ अग्रज का उदाहरण हैं । छोटे भाई भरत को राजगद्दी मिले इसके लिए उन्होंने सपत्नी सीता सहित सहर्ष 14 वर्ष का वनवास सहर्ष स्वीकार किया । छल से रावण द्वारा हरण की गई पत्नी के लिए समुद्र पर सेतु बना दिया और रावण से युद्ध कर पत्नी को पुनः प्राप्त कर लिया ।
भगवान् राम के साथ हनुमान जी भक्ति का विवरण न किया जाये तो राम गाथा अधूरी है, राम हनुमान को हनुमान को राम प्रिय हैं । भगवान् राम के प्रति हनुमान जी भक्ति से प्रसन्न होकर माता सीता ने उन्हें चिरंजीवी होने का वरदान दिया था । हनुमान जी ने खोई हुई सीता माता का पता लगाने किये समुद्र लाँघ लिया था और पता लगते ही सम्पूर्ण लंका में आग लगा दी । प्रभु राम लंका के राजा रावण का वध करके सीता माता को ससम्मान अवधपुरी लेकर जाएँ इसलिए हनुमान जी सीता माता को लंका से लेकर नहीं आये । हनुमान जी का एक मुष्टिक प्रहार ही रावण के जीवन को समाप्त करने के लिए पर्याप्त था । त्रेता युग के बाद भी आज कलयुग में हनुमान जी हर राम भक्त की सदैव रक्षा करते हैं ।
राजीव नयन धरें धनु सायक।
भगत बिपति भंजन सुख दायक॥
अर्थ: कमल के समान नेत्रों वाले, हाथ में धनुष-बाण धारण करने वाले भगवान श्री राम भक्तों के संकटों को दूर करने वाले और उन्हें सुख देने वाले हैं ।
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा।
हृदयं राखि कोसलपुर राजा॥
अर्थ: अयोध्या के राजा श्री राम को अपने हृदय में धारण करके (याद करके) नगर में प्रवेश करके अपने सारे काम पूरे करें, सफलता जरूर मिलेगी ।
दीनदयाल बिरदु संभारी।
हरहु नाथ मम संकट भारी॥
अर्थ: हे दीनों (गरीबों और असहायों) पर दया करने वाले प्रभु! अपने दयालु स्वभाव को याद करके मेरे इस भारी संकट को दूर कर दीजिए ।
सकल बिघ्न ब्यापहिं नहिं तेही।
राम सुकृपाँ बिलोकहिं जेही॥
अर्थ: जिस मनुष्य पर भगवान श्रीराम की कृपा रूपी दृष्टि पड़ जाती है, उसे कोई भी विघ्न या बाधा प्रभावित (व्याप्त) नहीं कर पाती है ।
होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥
अस कहि लगे जपन हरिनामा। गईं सती जहँ प्रभु सुखधामा॥
अर्थ: जो कुछ राम ने रच रखा है, वही होगा । तर्क करके कौन शाखा (विस्तार) बढ़ावे । (मन में) ऐसा कहकर शिवजी भगवान् श्री हरि का नाम जपने लगे और सतीजी वहाँ गईं, जहाँ सुख के धाम प्रभु श्री रामचंद्रजी थे ।
व्रत विधि Vrat Vidhi
मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिप्रदा से लेकर नवमी तिथि तक 9 दिन के व्रत की परंपरा हैहिन्दू पंचांग में चैत्र मास नवरात्री में शुक्ल पक्ष की प्रतिप्रदा से लेकर नवमी तिथि तक 9 दिन के व्रत की परंपरा है और नवमी तिथि को भगवान् श्री राम का जन्मोत्सव राम नवमी के रूप में मनाया जाता है । ठीक इसी प्रकार शरद ऋतु की दुर्गा पूजा नवरात्रि में शुक्ल पक्ष की प्रतिप्रदा से लेकर नवमी तिथि तक 9 दिन के व्रत की परंपरा है और दशमी के दिन रावण दहन विजय दशमी का पर्व मनाया जाता है ।
महत्व Significance
प्रतिदिन रामचरितमानस या रामायण के कुछ अंशों का भक्तिभाव से पाठ करें । ऐसी मान्यता है कि एक बार माता पार्वती ने भगवान् शिव से आप किसका ध्यान करते हैं तो शिव जी ने कहा "राम" नाम का ध्यान करता हूँ । यह भी कथा है की जब रावण ने सीता माता का हरण किया था तब भगवान् राम विलाप करते हुये सीता माता को ढूँढ रहे थे तो भगवान् शिव भी उनके साथ अपने लोक में विलाप कर रहे थे । यह देखकर माता पार्वती को आश्चर्य हुआ के शिव जी राम के लिये अश्रु बहा रहे हैं तब शिव जी कहा वो मेरे आराध्य है मैं उनको पीड़ा में नहीं देख पा रहा हूँ ।
फल एवं लाभ Spiritual Benefits
चित्त की शुद्धि, मानसिक बल और धर्म के प्रति सुदृढ़ आस्था का संचार होता है । श्री राम कथा जीवन में विवेक, सहनशीलता, धर्मनिष्ठा और त्याग का मार्ग दिखाती है । राम कथा श्रवण के समय मन को शांत रखें ।