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श्री गणेशाय नमः
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भगवान् शिव का महामृत्युंजय संजीवनी मंत्र "ॐ त्र्यम्बकं यजामहे"

पूर्ण महामृत्युंजय मंत्र ॐ हौं जूं स: ॐ भूर्भुव: स्व: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृता...

108 chantsएक निश्चित समय पर ही सुबह, सांयकाल या रात्रि
भगवान् शिव का महामृत्युंजय संजीवनी मंत्र  "ॐ त्र्यम्बकं यजामहे"

मंत्र Mantra

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् | उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ||

अर्थ Meaning

पूर्ण महामृत्युंजय मंत्र ॐ हौं जूं स: ॐ भूर्भुव: स्व: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्व: भुव: भू: ॐ स: जूं हौं ॐ !! हम त्रिनेत्र (भगवन शिव) को पूजते हैं, जो (भगवन शिव) सुगंधित हैं, हमारा पोषण करते हैं, जिस तरह वृक्ष पर लगा हुआ फल फल, टूटकर शाखा के बंधन से मुक्त हो जाता है, वैसे ही हम (मनुष्य) भी मृत्यु और नश्वरता से मुक्त हो जाएं।

भक्ति महत्व Devotional Significance

यह महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव का संजीवनी मंत्र भी माना जाता है। यह भगवान् शिव का अत्यंत प्रभावशाली मंत्र है। इसके उच्चारण मात्र से ही उत्पन्न हुई ध्वनि के कंपन से शरीर के चारों ओर दैविक ऊर्जाओं और शक्तियों का सुरक्षा कवच निर्मित हो जाता है । वेदों के आधार पर ऐसा माना जाता है कि इस महामृत्युंजय मंत्र के नियमित श्रवण या जाप से रोग, शारीरिक कष्ट, अमंगल, दुर्घटना या विपत्तियां, जीवन की कठिन परिस्थितियाँ मनुष्य से दूर रहती हैं । इस मंत्र के द्वारा आप सबसे जल्दी भगवान् शिव शंकर शम्भु को प्रसन्न कर सकते हैं ।

जप विधि एवं निर्देश Practice Guidance

एक निश्चित समय पर ही सुबह, सांयकाल या रात्रि में शुद्ध चित्त, मन, शरीर एवं आत्मा से भगवान् शिव का ध्यान करके और संकल्प करके कम से कम 41 दिन लगातार 108 बार करना चाहिए ।