पद / गीत Lyrics
श्रित-कमला-कुच-मण्डल धृत-कुण्डल ए,
कलित-ललित-वन-माल जय जय देव हरे॥
दिन-मणि-मण्डल-मण्डन भव-खण्डन ए,
मुनि-जन-मानस-हंस जय जय देव हरे॥
कालिय-विष-धर-गञ्जन जन-रञ्जन ए,
यदुकुल-नलिन-दिनेश जय जय देव हरे॥
मधु-मुर-नरक-विनाशन गरुडासन ए,
सुर-कुल-केलि-निदान जय जय देव हरे॥
अमल-कमल-दल-लोचन भव-मोचन ए,
त्रिभुवन-भुवन-निधान जय जय देव हरे॥
जनक-सुता-कृत-भूषण जित-दूषण ए,
समर-शमित-दश-कण्ठ जय जय देव हरे॥
अभिनव-जल-धर-सुन्दर धृत-मन्दर ए,
श्रीमुख-चन्द्र-चकोर जय जय देव हरे॥
तव चरणे प्रणता वयमिति भावय ए,
कुरु कुशलं प्रणतेषु जय जय देव हरे॥
श्री-जयदेव-कवेरुदितमिदं कुरुते मृदम्,
मंगल-मंजुल-गीतं जय जय देव हरे॥
राधे कृष्णा हरे गोविंद गोपाला नन्द जू को लाला ।
यशोदा दुलाला जय जय देव हरे ॥
रचना: महाकवि जयदेव गोस्वामी
